New Zealand Women vs England Women

New Zealand Women vs England Women: मजबूत शुरुआत के बावजूद बिखरी न्यूजीलैंड टीम, इंग्लैंड की युवा खिलाड़ियों ने बदला मैच का रुख

न्यूजीलैंड महिला टीम ने पहले वनडे में एक समय शानदार स्थिति बना ली थी, लेकिन आखिर के ओवरों में पूरी बल्लेबाजी अचानक लड़खड़ा गई और टीम 210 रन पर सिमट गई। मैडी ग्रीन और मेली केर की बेहतरीन साझेदारी के बावजूद व्हाइट फर्न्स बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकीं। दूसरी ओर इंग्लैंड की युवा खिलाड़ियों ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले में वापसी कराई।

तीन मैचों की new zealand women vs england women वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। शुरुआत में उनकी गेंदबाजी प्रभावशाली रही, लेकिन फील्डिंग ने टीम की मुश्किलें बढ़ाईं। इसके बावजूद आखिर में इंग्लैंड ने लगातार विकेट लेकर न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोक दिया।

शुरुआती झटके के बाद संभली न्यूजीलैंड

इंग्लैंड को मैच की पहली सफलता बहुत जल्दी मिल गई। तेज गेंदबाज लॉरेन फिलर ने अनुभवी बल्लेबाज सूजी बेट्स को पवेलियन भेज दिया। बेट्स ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंद पर शॉट खेलने गईं, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर एमी जोन्स के हाथों में चली गई।

शुरुआत अच्छी होने के बाद इंग्लैंड ने दबाव जरूर बनाया, लेकिन टीम फील्डिंग में लगातार गलतियां करती नजर आई। जॉर्जिया प्लिमर को शुरुआती जीवनदान मिला जब माया बुशियर ने उनका आसान कैच छोड़ दिया। यह मौका न्यूजीलैंड के लिए अहम साबित हुआ और टीम ने धीरे-धीरे रन गति बढ़ानी शुरू कर दी।

हालांकि ज्यादा देर तक प्लिमर टिक नहीं सकीं। इंग्लैंड की युवा स्पिनर टिली कॉर्टीन-कोलमैन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआती गेंदों में ही बड़ा विकेट हासिल कर लिया। प्लिमर आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलना चाहती थीं, लेकिन गेंद सही तरीके से बल्ले पर नहीं आई और मिड-ऑफ पर आसान कैच दे बैठीं।

मैडी ग्रीन और मेली केर ने संभाली पूरी पारी

प्लिमर के आउट होने के बाद मेली केर क्रीज पर आईं और फिर उन्होंने मैडी ग्रीन के साथ मिलकर न्यूजीलैंड की पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों ने जल्दबाजी नहीं दिखाई और धीरे-धीरे इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू किया।

मैडी ग्रीन काफी आत्मविश्वास में दिखीं। उन्होंने मैदान के हर हिस्से में रन निकाले और खराब गेंदों को बाउंड्री तक पहुंचाया। दूसरी तरफ मेली केर ने भी समझदारी से बल्लेबाजी करते हुए स्ट्राइक रोटेट की।

दोनों के बीच 100 से ज्यादा रन की साझेदारी हुई और ऐसा लगने लगा कि न्यूजीलैंड आसानी से 250 रन के करीब पहुंच जाएगा। इंग्लैंड की गेंदबाजी के मुकाबले इस दौरान न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी ज्यादा संतुलित नजर आई।

इंग्लैंड की फील्डिंग फिर बनी चिंता

मैच के दौरान इंग्लैंड की फील्डिंग ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए। कई मौकों पर आसान रन दिए गए और कुछ साधारण गलतियों ने न्यूजीलैंड को राहत पहुंचाई।

मिडविकेट और मिडऑन पर गेंद रोकने में हुई गलतियों से न्यूजीलैंड को चौके मिले। डैनी गिब्सन और लॉरेन बेल के बीच तालमेल की कमी भी साफ दिखाई दी। इससे पहले भी इंग्लैंड की फील्डिंग बड़े टूर्नामेंटों में आलोचना झेल चुकी है और इस मैच में भी वही समस्या नजर आई।

हालांकि कप्तानी संभाल रहीं चार्ली डीन लगातार खिलाड़ियों को उत्साहित करती दिखीं और उन्होंने गेंदबाजी में अच्छे बदलाव किए।

जोडी ग्रूकॉक ने दिलाया अहम विकेट

जब न्यूजीलैंड की साझेदारी मजबूत होती जा रही थी, तब इंग्लैंड को सफलता दिलाई डेब्यू कर रहीं जोडी ग्रूकॉक ने। उन्होंने मेली केर को आउट कर मैच का रुख बदल दिया।

गेंद पूरी तरह नियंत्रित नहीं थी, लेकिन केर उसे जोर से खेलने के प्रयास में गलती कर बैठीं। गेंद हवा में चली गई और लॉरेन बेल ने आसान कैच पकड़ लिया।

मेली केर का विकेट इंग्लैंड के लिए बेहद अहम था क्योंकि इसके बाद न्यूजीलैंड की पारी धीरे-धीरे दबाव में आ गई।

चार्ली डीन की कप्तानी रही असरदार

नियमित कप्तान नैट साइवर-ब्रंट चोट के कारण इस मुकाबले में नहीं खेल रही थीं। उनकी जगह चार्ली डीन को टीम की जिम्मेदारी मिली और उन्होंने शानदार तरीके से नेतृत्व किया।

चार्ली डीन ने गेंदबाजी में समझदारी दिखाई और सही समय पर खुद गेंदबाजी करने आईं। उन्होंने ब्रूक हॉलिडे को एलबीडब्ल्यू आउट कराया। मैदान पर अंपायर ने शुरुआत में बल्लेबाज को नॉट आउट दिया था, लेकिन इंग्लैंड ने रिव्यू लिया और फैसला उनके पक्ष में गया।

डीन ने किफायती गेंदबाजी करते हुए रन भी रोके और विकेट भी निकाले। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने दबाव बनाए रखा।

आखिरी ओवरों में पूरी तरह टूट गई न्यूजीलैंड

मैडी ग्रीन जब तक क्रीज पर थीं तब तक न्यूजीलैंड मजबूत स्थिति में था। लेकिन उनके आउट होते ही पूरी टीम बिखर गई।

डैनी गिब्सन ने डीप में शानदार कैच पकड़कर ग्रीन की पारी खत्म की। ग्रीन 88 रन बनाकर आउट हुईं और इसके बाद विकेटों की झड़ी लग गई।

कुछ ही ओवरों में न्यूजीलैंड ने लगातार विकेट गंवा दिए। लॉरेन बेल ने लगातार दो गेंदों पर दो बल्लेबाजों को आउट कर इंग्लैंड को पूरी तरह मैच में वापस ला दिया।

निचले क्रम के बल्लेबाज दबाव नहीं झेल सके और पूरी टीम 210 रन पर ऑलआउट हो गई। एक समय जो टीम बड़े स्कोर की ओर बढ़ रही थी, वह अचानक संघर्ष करती नजर आई।

इंग्लैंड की नई खिलाड़ियों ने छोड़ी छाप

इस मुकाबले में इंग्लैंड की युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन टीम के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक बात रहा। टिली कॉर्टीन-कोलमैन ने अपने पहले ही मैच में आत्मविश्वास के साथ गेंदबाजी की और दो विकेट हासिल किए।

जोडी ग्रूकॉक ने अहम सफलता दिलाई, जबकि डैनी गिब्सन ने विकेट के पीछे और मैदान में अच्छी ऊर्जा दिखाई। इंग्लैंड टीम प्रबंधन के लिए यह संकेत अच्छा है कि नई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार दिख रही हैं।

चोटों ने बढ़ाई इंग्लैंड की परेशानी

इंग्लैंड पहले से ही कई चोटों की समस्या से जूझ रहा है। कप्तान नैट साइवर-ब्रंट calf injury के कारण टीम से बाहर हैं। वहीं ऑलराउंडर एम अर्लॉट concussion की वजह से पूरी सीरीज से बाहर हो गईं।

मैच शुरू होने से ठीक पहले इज़ी वोंग को भी हैमस्ट्रिंग में परेशानी हुई, जिसके बाद लॉरेन फिलर को अंतिम एकादश में शामिल किया गया।

इन समस्याओं के बावजूद इंग्लैंड ने जिस तरह वापसी की, उससे टीम का आत्मविश्वास जरूर बढ़ेगा।

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न्यूजीलैंड के लिए सबक

इस मैच ने न्यूजीलैंड को साफ संदेश दिया कि सिर्फ दो बल्लेबाजों के दम पर बड़े मुकाबले नहीं जीते जा सकते। मैडी ग्रीन और मेली केर ने शानदार बल्लेबाजी की, लेकिन बाकी बल्लेबाज उनका साथ नहीं दे सके।

अगर न्यूजीलैंड महिला बनाम इंग्लैंड महिला को सीरीज में मजबूती से वापसी करनी है तो मध्यक्रम और निचले क्रम को बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

पहले वनडे में इंग्लैंड ने भले कुछ आसान गलतियां की हों, लेकिन आखिर के ओवरों में जिस तरह टीम ने वापसी की, उसने मुकाबले को पूरी तरह बदल दिया।

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